सफ़र



जिंदगी ,एक सफ़र ही तो है,
आज यहां, कल और कही ,
परसो कहां , 
सफ़र तो सफर है,
अनुकूल हो या, प्रतिकूल
सुखद हो या दुखद
रो के करो या हस के
बोझ समझो तो बोझ
ना तो फिर मौज।
जाने अनजाने
परिचित अपरिचित
तो मिलेंगे ही
सबका अपना अपना
तय तो करना ही है
सफ़र ही तो है
रास्ता कैसा भी हो
सुगम सहज हो न हो
मंजिल तो तय है
आगे बढ़ना ही है
रुकना नहीं, 
रोड़े तो आयेंगे 
और हट जाएंगे।
हर वक्त मौज मस्ती 
और सुख 
तो होगा नही न।
सफ़र हैं
तो आगे बढ़ना है।


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