शांति सदभाव हो, चारो ओर।
रंग बिरंगे रंगो में रंगे लोगो,
के मन में हो एक की रंग।
ऐसी हो इस बार की होली।
अहम, घमंड, द्वेष जलाए
दूसरो की खुशी में खुश हो,
ईर्षा मन में न हो
प्रभु भक्ति, प्रेम की मिठास
ऐसी हो इस बार की होली।
मेरा छोटा सा प्रयास है, अपने विचारों को कविता के माध्यम से रखने का। कुछ त्रुटी हो सकती है, अपने सुझाव जरूर दे।
अजीब सी है पूर्व पश्चिम की उलझन, उल्टा सीधा, सीधा उल्टा। वेश परिवेश खान पान जल वायु नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार सबके अपने अपने । दोन...