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अर्जुन बन जाऊ



सोचता हु अर्जुन बन जाऊ मैं
अर्जन करलू अपने कृष्ण से।
सतत संयम शील स्वभाव,
संघर्ष अपने काम क्रोध लोभ 
अपने कुविचारों  के विरुद्ध 
तो करना युद्ध ही होगा न।
अनीति अन्याय अत्याचार
कितना ही विकराल हो,
सारथी साथ तो सब आसान 
अपने कृष्ण का साथ पा लू
आसान तो नही पर, 
सोचता हु अर्जुन बन जाऊ ।




आंख बंद

आंख बंद करके सोशल मीडिया को धरती पर विश्वास, चलते हैं ये लोग जीवन की अनदेखी के संग।

खोये हुए हैं वो खुद को इस व्यस्तता में, रंगी हुई दुनिया में, खो गए अपनी पहचान।

लगाते हैं विश्वास उन पोस्टों की आँधी में, जो छिड़कती हैं झूलती समाज की विभिन्न रंगिनी।

जीवन के असली मोमेंट्स से दूर चलते हैं ये लोग, खोये हुए हैं स्वयं को अपनी ही सोच की झूली में।

आंखों की जगह इन्टरनेट ने हमें ले ली है, सच्चाई के आईने अब नजदीक आते ही छिप जाते हैं।

खराब होते हैं अपने आपसी संबंध इन मशीनों के सामर्थ्य में, ज़िन्दगी की सौभाग्यशाली रेलगाड़ी से हो गयी है वो वंचित।

समय खरीदते हैं इन्टरनेट के मोल बाजार, भूल गए हैं वो साथी, जो हैं सच्चे और अमानतदार।

ज़िंदगी जीने का वो मज़ा छिप गया है जहां, आंख खोलो, विश्वास रखो, और साथी ढूंढो अपने मन के कोनों में।


न जाने क्या हो अगले पल।



न जाने क्या हो अगले पल,
रचनाकार के रंगमंच पर,
एक किरदार निभा रहे है,
उसकी उंगली पर नाच रहे है।
अपने अतीत के खट्टे मीठे 
पल एहसास दिलाते हैं ये सब
फिर सबक नहीं सीखा है कि
हम तो राहगीर है  वो,
जहा चाहे वहां ले जाए
हमे भी इस बात पर यकीन है,
वो जो भी करेगा सही होगा,
हर पल हर कर्म हर दिन
ये न भूले हम याद रहे,
न जाने क्या हो अगले पल,
रचनाकार के रंगमंच पर,
एक किरदार निभा रहे है,
हम सब माटी के पुतले है,
हवा, पानी, बरसात, 
में भी निरंतर चलना है,
कोई काम नही अपना,सब उसका। 
जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा
वही होगा जो वो चाहेगा,
बनाना बिगड़ना, रुकना चलना,
सब उसका कुछ नहीं अपना,
न जाने क्या हो अगले पल,
रचनाकार के रंगमंच पर,
एक किरदार निभा रहे है,
उसकी उंगली पर नाच रहे है।

मन में हो विश्वास




सब  संभव हो जाता है, जब मन में हो विश्वास।
श्रद्धा सयम प्रयत निरंतर, ध्येय पर हो नज़र।।
ईश भी उनका साथ देता है, जो स्वयं का देता।
सब संभव हो जाता है, जब मन में हो विश्वास।।
देश काल परिस्थिति पर होता नियंत्रण उसका।
होता स्वयं पर नियंत्रण लक्ष निश्चित हो उसका।।
कुछ करने की हो इच्छा तो , क्या नही होता।
सब संभव हो जाता है, जब मन में हो विश्वास।।


अपने विचार रखे

अजीब सी है पूर्व पश्चिम की उलझन, उल्टा सीधा, सीधा उल्टा। वेश परिवेश खान पान जल वायु नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार  सबके अपने अपने । दोन...

एक नजर इधर भी