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न जाने क्या हो अगले पल।



न जाने क्या हो अगले पल,
रचनाकार के रंगमंच पर,
एक किरदार निभा रहे है,
उसकी उंगली पर नाच रहे है।
अपने अतीत के खट्टे मीठे 
पल एहसास दिलाते हैं ये सब
फिर सबक नहीं सीखा है कि
हम तो राहगीर है  वो,
जहा चाहे वहां ले जाए
हमे भी इस बात पर यकीन है,
वो जो भी करेगा सही होगा,
हर पल हर कर्म हर दिन
ये न भूले हम याद रहे,
न जाने क्या हो अगले पल,
रचनाकार के रंगमंच पर,
एक किरदार निभा रहे है,
हम सब माटी के पुतले है,
हवा, पानी, बरसात, 
में भी निरंतर चलना है,
कोई काम नही अपना,सब उसका। 
जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा
वही होगा जो वो चाहेगा,
बनाना बिगड़ना, रुकना चलना,
सब उसका कुछ नहीं अपना,
न जाने क्या हो अगले पल,
रचनाकार के रंगमंच पर,
एक किरदार निभा रहे है,
उसकी उंगली पर नाच रहे है।

मासाब है न !


कुछ भी काम हो
दिन हो या रात हो,
सुबह या शाम हो,
जनवरी हो या मई हो,
अरे मासाब है न।
घर हो या बाहर हो,
सरकारी हो या प्राइवेट हो,
काम कुछ भी हो, 
मासाब है  न लगा दो काम पे।
खल्लासी का हो, या कंडक्टर का,
चपरासी का हो या चौकीदार का,
शमशान का हो या कब्रिस्तान का,
मतगणना का हो या जनगणना का
क्षमा  का हो या अपमान का,
छोटा हो या बड़ा, 
चुनाव हो या कुछ भी,
नेता का हो या अभी नेता का,
मासाब है न, लगा दो।
मना नहीं करते,
काम पूरा जवाबदारी से,
बिना सेवा शुल्क, 
बिना पेंशन के, 
आधा नही पूरा होगा।
मासाब है न।


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