,ओ तो जगतपालनहार प्रिया
लक्ष्मीअवतार है न,
पल में क्या नही कर सकती,कल्पना से परे है न,
फिर भी क्यों ?
नंगें पाव वन गमन,
कुटिया मेंं निवास
पकवान नही फलों का सेवन
क्यों क्यों आखिर क्यों ?
फिर भी लक्ष्मी स्वरूपा का,
पापी नीच करता अपहरण
क्यों असहाय विलाप
जिसकी इच्छा मात्र से,
प्रलय हो भयंकर ,
उसका अधम करता अपहरण
आखिर फिर भी क्यों ?
जिसके एक तिनके से,
भयभीत त्रिलोक विजई,
जिस पर रावण दृष्टि तक न,
ठहर पाई, फिर भी क्यों ?
अग्नि् परीक्षा की घड़ी आई।
अग्नि् परीक्षा देने पर भी,
तोहमत लगाई।
फिर वन वन भटके सीता माई,
जगदीश पत्नी है न,
फिर भी क्यों ?
जिनके एक आवाज परपालन हार क्या न कर सकते,धरती भी थी थर्राई,फिर भी क्यों ?गोद में जिसके समाईयह कविता एक प्रश्न है आप खुद विचार करे ।

