न दिन को , न रात को चैन,
पल पल हाय हाय, कभी नही आराम।
न राम के लिए, न रहीम के लिए,
न राधा के लिए, न रूखमणी के लिए,
न लक्ष्मण के लिए, न बलराम के लिए,
न सुग्रीव के लिए, न सुदामा के लिए,
न किसी अपने के लिए, समय नहीं,
जीवन की आप धापी मे।
जीवन तो जीना सबको है,
अच्छे से जियो, बुरे से जियो,
ईमानदारी या बेमानी से जियो,
मेहनत से जियो या मक्कारी से,
जीना तो सब को है न ,
जीवन की आप धापी तो होगी ही।
जो होना है ओ तो होगा ही,
पर व्यवस्थित सुंदर सुखद हो,
सबके अपने अपने राम का हो,
विश्वास का हो, सुखद हो,
जीवन की आप धापी व्यवस्थित हो।
कर्म का फल तो चाहिए,
ओ भी मीठा ज्यादा और बड़ा ,
न कृष्ण की सीख, न राम की मर्यादा,
कुछ भी याद नहीं रहने देती ये,
अजीब है ये जीवन की आप धापी।

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