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हम शिक्षक है



हमें मालूम है हम क्या है,
आग हवा पानी हम से है,
हम से ही है जमाना,
 हमने कभी हार नही मानी।
भारत मां के ओ सपूत है,
जो पत्थर को बना दे पानी।
भले ही हमे  तिनका मानो,
तिनके से ही हारा था अभिमानी।
हम शिक्षक है, हम गुरु है,
मां भी हम है, पिता भी हम।
दोस्त हम, दुश्मन हम
धरा हम है, आकाश हम है,
पाताल हम , गुरु हम है,
तिल हम, ताड़ हम।
चर हम, अचर हम।
गुरु हम, गोविद हमसे है।

 🌷संजय कुमार सोनारे 🌷शिक्षक 🌷

मासाब है न !


कुछ भी काम हो
दिन हो या रात हो,
सुबह या शाम हो,
जनवरी हो या मई हो,
अरे मासाब है न।
घर हो या बाहर हो,
सरकारी हो या प्राइवेट हो,
काम कुछ भी हो, 
मासाब है  न लगा दो काम पे।
खल्लासी का हो, या कंडक्टर का,
चपरासी का हो या चौकीदार का,
शमशान का हो या कब्रिस्तान का,
मतगणना का हो या जनगणना का
क्षमा  का हो या अपमान का,
छोटा हो या बड़ा, 
चुनाव हो या कुछ भी,
नेता का हो या अभी नेता का,
मासाब है न, लगा दो।
मना नहीं करते,
काम पूरा जवाबदारी से,
बिना सेवा शुल्क, 
बिना पेंशन के, 
आधा नही पूरा होगा।
मासाब है न।


अपने विचार रखे

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