हम शिक्षक है



हमें मालूम है हम क्या है,
आग हवा पानी हम से है,
हम से ही है जमाना,
 हमने कभी हार नही मानी।
भारत मां के ओ सपूत है,
जो पत्थर को बना दे पानी।
भले ही हमे  तिनका मानो,
तिनके से ही हारा था अभिमानी।
हम शिक्षक है, हम गुरु है,
मां भी हम है, पिता भी हम।
दोस्त हम, दुश्मन हम
धरा हम है, आकाश हम है,
पाताल हम , गुरु हम है,
तिल हम, ताड़ हम।
चर हम, अचर हम।
गुरु हम, गोविद हमसे है।

 🌷संजय कुमार सोनारे 🌷शिक्षक 🌷

कोई टिप्पणी नहीं:

अपने विचार रखे

अजीब सी है पूर्व पश्चिम की उलझन, उल्टा सीधा, सीधा उल्टा। वेश परिवेश खान पान जल वायु नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार  सबके अपने अपने । दोन...

एक नजर इधर भी