जानता मानता है कि,
जीतता तो सत्य ही है,
असत्य, आतंक, अनाचार, अत्याचार
हो कितना भी,
प्रबल, प्रचंड, प्रगाढ़ प्रचारित
जीतता तो सत्य ही है,
देर सबेर हो सकती है पर
प्रताड़ित तो होना ही है
झूठ का बोलबाल
तो होता ही है पर अंत मे
जीतता तो सत्य ही है
मेरा छोटा सा प्रयास है, अपने विचारों को कविता के माध्यम से रखने का। कुछ त्रुटी हो सकती है, अपने सुझाव जरूर दे।
अजीब सी है पूर्व पश्चिम की उलझन, उल्टा सीधा, सीधा उल्टा। वेश परिवेश खान पान जल वायु नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार सबके अपने अपने । दोन...
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