फिर अपने पास ही अंधेरा क्यों,
क्यों होता है दिया तले अंधेरा।
वो तो समाज सुधारक है न,
फिर खुद दी दिशा विहीन क्यों,
पथ प्रदर्शक खुद पथभ्रष्ट,
समझ से परे है,
सच ही कहा गया है कि,
ज्ञान बाटना आसान है
उस पर अमल करना कठिन।
जो नियम बनाता है
ओ ही सबसे पहले तोड़ता है।

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