रोना आ रहा पर




रोना आ रहा पर,
रो नही पा रहा हूं ।
सिसकना चाहता हूं पर,
सिसक नही पा रहा हूं।
अजीब है जिंदगी,
जिन हाथों ने मुझे संभाला,
उन्हे अपने हाथों को,
संभाल नही पा रहा हूं।
सोचता मेरे लिए तो कुछ दिन है,
पर उसने तो वर्षों संभाला है,
कैसे किया ये सब,
माफ करना पर अब तो,
रो भी नही पा रहा हूं।


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