अजीब सी है पूर्व पश्चिम की उलझन,
उल्टा सीधा, सीधा उल्टा।
वेश परिवेश खान पान जल वायु
नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार 
सबके अपने अपने ।
दोनों अपनी माटी देश में उचित
पर दूसरे के देश में अनुचित।
सिमट चुकी दुनिया में 
पल यहां पल में वहां 
फिर कैसा अपना अपना
वेश परिवेश खान पान जल वायु
नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार 
क्या उचित क्या अनुचित 
आचार विचार अच्छा बुरा
सब गोल मॉल हो रहा,।
कोई अच्छाई तो कोई बुराई 


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अजीब सी है पूर्व पश्चिम की उलझन, उल्टा सीधा, सीधा उल्टा। वेश परिवेश खान पान जल वायु नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार  सबके अपने अपने । दोन...

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