अजीब सी है पूर्व पश्चिम की उलझन,
उल्टा सीधा, सीधा उल्टा।
वेश परिवेश खान पान जल वायु
नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार 
सबके अपने अपने ।
दोनों अपनी माटी देश में उचित
पर दूसरे के देश में अनुचित।
सिमट चुकी दुनिया में 
पल यहां पल में वहां 
फिर कैसा अपना अपना
वेश परिवेश खान पान जल वायु
नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार 
क्या उचित क्या अनुचित 
आचार विचार अच्छा बुरा
सब गोल मॉल हो रहा,।
कोई अच्छाई तो कोई बुराई 


अर्जुन बन जाऊ



सोचता हु अर्जुन बन जाऊ मैं
अर्जन करलू अपने कृष्ण से।
सतत संयम शील स्वभाव,
संघर्ष अपने काम क्रोध लोभ 
अपने कुविचारों  के विरुद्ध 
तो करना युद्ध ही होगा न।
अनीति अन्याय अत्याचार
कितना ही विकराल हो,
सारथी साथ तो सब आसान 
अपने कृष्ण का साथ पा लू
आसान तो नही पर, 
सोचता हु अर्जुन बन जाऊ ।




पर उपदेश कुशल बहुतेरे



पर उपदेश कुशल बहुतेरे
अपने काम में वे निराधार
दूसरों को बताते हैं राह
खुद भटकते हैं अंधेरे में

पर उपदेश कुशल बहुतेरे
अपने जीवन में वे असफल
दूसरों को सिखाते हैं धर्म
खुद करते हैं पापों का घेर

पर उपदेश कुशल बहुतेरे
अपने विचार में वे अहंकारी
दूसरों को देते हैं उपहास
खुद बनते हैं लोगों का उपहास

पीड़ा तो होती है न !



पीड़ा तो होती है न ,
जब ईमानदार परेशान होता है,
और वेईमान मौज उड़ता है।
ईमानदार को फर्जी काम,
करने को कहा जाए।
पीड़ा तो होती है न !
सुना है सत्य परेशान होता है,
पर जब जबरदस्ती परेशान हो,
असत्य झूठ असूर सिरमौर हो,
पीड़ा तो होती है न !
बापु ने तो कहा था न,
परपीड़ा परहित सम धर्म नही,
तो फिर जब उनका पथिक,
अधर्मियो द्वारा परेशान हो तो,
पीड़ा तो होती है न !
जब कर्म ईमानदारी से न हो,
जब झूठे निकम्मे भ्रष्ट ज्ञान बाटे,
सच्चाई ईमानदारी, हो परेशान
पीड़ा तो होती है न !
       ......... निरंतर।


अपने विचार रखे

अजीब सी है पूर्व पश्चिम की उलझन, उल्टा सीधा, सीधा उल्टा। वेश परिवेश खान पान जल वायु नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार  सबके अपने अपने । दोन...

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