
आज कल मेरे,पाव जमीन पर।
होता है ऐसा ही,
जब आती है आपदा।
कैसा भयंकर मंजर,
मन सोच घबराए।
क्यों आई ये,
कोविड-19 महापदा,
कैसे आई ये विपदा भयंकर।
कर्मो का फल तो नही,
संकीर्णता अधर्म पाप दुराचार,
तो फैला हुआ था अपार।
अकल ठिकाने लगा दी,
ज्यादा उड़े नही,
रखे पाव जमीन पर।
सादा जीवन उच्च विचार,
बेकार है धन दौलत अपार।
क्या खोया क्या पाया,
कौन अपना कोन पराया।
कोई शक्ति तो है,
जो कहती है रखो,
अपने पाव जमीन पर।
लगता है टाटा सोनू सूद,
ईश्वर के हो अवतार।
दुआ दिल से देते,
लोग कहते है तुम्ही हो पालनहार।।
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