फिर भी क्यों ?

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ओ तो जगतपालनहार प्रिया
लक्ष्मीअवतार है न,
पल में क्या नही कर सकती,
कल्पना से परे है न,
फिर भी क्यों ?

 

नंगें पाव वन गमन,
कुटिया मेंं  निवास
पकवान नही फलों का सेवन
क्यों क्यों आखिर क्यों ?

फिर भी लक्ष्मी स्वरूपा का, 
पापी नीच करता अपहरण
क्यों असहाय विलाप
जिसकी इच्छा मात्र से,
प्रलय हो भयंकर , 
उसका अधम करता अपहरण
आखिर फिर भी क्यों ?

 

जिसके एक तिनके से,
भयभीत त्रिलोक विजई, 
जिस पर रावण दृष्टि तक न,
ठहर पाई, फिर भी क्यों ?
अग्नि् परीक्षा की घड़ी आई।
अग्नि् परीक्षा देने पर भी,
तोहमत लगाई।
फिर वन वन भटके सीता माई,
जगदीश पत्नी है न, 
फिर भी क्यों ?
जिनके एक आवाज पर
पालन हार क्या न कर सकते,
धरती भी थी थर्राई, 
फिर भी क्यों ?
गोद में जिसके समाई




यह कविता एक प्रश्न है आप खुद विचार करे । 




3 टिप्‍पणियां:

Aaditya Sonare ने कहा…

Nice

Aaditya Sonare ने कहा…

Nice

Unknown ने कहा…

बेहतरीन प्रयास ,,

अपने विचार रखे

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