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अजीब सी है पूर्व पश्चिम की उलझन, उल्टा सीधा, सीधा उल्टा। वेश परिवेश खान पान जल वायु नहाना धोना नाते रिश्ते वार त्यौहार सबके अपने अपने । दोन...
एक नजर इधर भी
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क्या मैं सही हूं ? मेरा व्यहार,मेरा चरित्र,मेरे विचार, कोई अपना-पराया आहत तो नही, कई बार मन में तूफान सा उठता है, फिर वही निरूत्तर प्रश्न, क...
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कैसी है ये जीवन की आपा धापी न दिन को , न रात को चैन, पल पल हाय हाय, कभी नही आराम। न राम के लिए, न रहीम के लिए, न राधा के लिए, न रूखमणी के ल...
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उठो जागो चलो, हो जाओ तैयार। नही तो, होगा भविष्य बेकार। जो सोवत है सो खोवत है। अभी नही तो कभी नही। बिना मांगे कुछ नही मिलता, अपने हक के लिए, ...
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